Force Motion And Gravity | सामान्‍य विज्ञान पार्ट-5

GK TEST Physics

सामान्‍य विज्ञान से रिलेटेड एक और पार्ट लेकर आये हैं हम इसमे विशेषत: Force Motion and Gravity से संबंधित है।
इससे रिलेटेड जो भी प्रश्‍न और जानकारी बनती है वो आपको इस पोस्‍ट में दिया जा रहा है।

Force Motion And Gravity GK

गति (Motion)-
वस्‍तु की स्‍थित‍ि अर्थात पोजीशन में बदलाव ही गति कहलाता है। स्‍थिर वस्‍तु की पोजीशन का इधर उधर होना
ही गति कहलाता है।

किसी वस्‍तु की गति का समान या असमान होना उस
वस्‍तु के वेग पर निर्भर करता है जो कि स्थिर है या बदल
रहा है।
वेग(velocity)-
किसी दूरी को तय करने मे जो समय लगता है उसे चाल
कहते हैं पर वेग भी यही है अन्‍तर इतना है कि वेग मे एक निश्‍चित दिशा होनी चाहिए। इसका मात्रक मी/सें होता है।


त्‍वरण- किसी वस्‍तु के वेग मे जो परिवर्तन होता है इसे इस प्रकार समझिये जैसे कोई कार 20 मी/सें. है फिर अगले ही सेकंड यह 40 मी/सें. हो गया तो यह परिवर्तन
ही उसका त्‍वरण है।
इसमे आप त्‍वरण इस प्रकार निकाल सकते हैं – अंतिम स्‍पीड 40 मी/से है और उसकी शुरूआत की स्‍पीड 20 मी/से है तो दोनो का अंतर 20 मी/सें हुआ अत: त्‍वरण 20 मी/वर्ग से. हुआ।
त्‍वरण का मात्रक मी/वर्ग सेकंड होता है।

Force Motion And Gravity GK


एक समान गति- इसे इस प्रकार समझ सकते हैं जैसे कोई कार 40 किमी/घंटा चल रही है तो वह अगले घंटे मे भी 40 किमी/घंटा ही रहे, फिर अगले घंटे में 40किमी/घंटा तो इसे एक समान गति कहते हैं।

असमान गति- यदि कोई कार 40 किमी/घंटा है तो वह
अगले घंटे मे 60 किमी/घंटा फिर अगले घंटे में बदल जाये तो यही असमान गति है।
विशेष- स्‍पीड को मापने के लिए एक यंत्र होता है उसे ओडोमीटर कहते हैं।

वस्‍तु के वेग में परिवर्तन होता है तो वह त्‍वरण है और इसे
ही हम कहते हैं कि वह वस्‍तु त्‍वरित हो रही है। परीक्षा मे
इसके उदाहरण पूछे जाते हैं तो हम एक उदाहरण बताते है इससे आप आगे के उदाहरण खुद समझ जायेंगे।
उदाहरण- जब हम दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो वह गोलाकार या चौकोर पथ हो सकता है। अब जब दौड़ते है तो किनारो पर जाकर या स्‍पीड बढ़ा लेगे या कम कर लेंगे तो यह तो वेग परिवर्तन हो गया अत: इसे ही त्‍वरित गति कहते हैं।

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बल (Force)-
इसकी परिभाषा तो आप जानते ही होंगे पर यहां हम केवल समझाने का प्रयत्‍न करेंगे कि बल क्‍या है।
किसी भी वस्‍तु कि पोजीशन को बदलना या उसमे जो गति या स्‍पीड जो भी हो उसकी पोजीशन को जिस तरीके से बदल सकते हैं उसे ही बल कहते हैं। इसका मात्रक न्‍यूटन होता है।
संतुलित बल- ऐसा बल जब कोई वस्‍तु पर लगाया जाये तो वह अपनी पोजीशन को बदले ही न उसे संतुलित बल कहते हैं।
असंतुलित बल- ऐसा बल जब किसी वस्‍तु पर लगाया जाये तो जिस तरफ बल अधिक होगा वह वस्‍तु उसी तरफ जायेगी। इसे ही असंतुलित बल कहते हैं।किसी वस्‍तु को त्‍वरित करने के लिए अर्थात चलने के लिए उस पर असंतुलित बल का प्रयोग किया जाता है।

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Newton’s First law


न्‍यूटन के गति का नियम
प्रथम नियम – हर वस्‍तु अपनी ही अवस्‍था में बनी रहती है अर्थात जैसे है वैसे ही पर यह तब तक रहती जब तक की उस पर कोई बाहरी बल न लगाया जाये। इसे ही जड़त्‍व का नियम भी कहते हैं। इसमे वस्‍तु त्‍वरण को प्राप्‍त करती है।
विरामावस्‍था- वह पोजीशन जब वस्‍तु की स्थिति में कोई बदलाव न हो रहा हो या न हो।
गतिक अवस्‍था- वह स्थिति जब वस्‍तु गति की स्थिति में हो जैसे कोई बस चलती है तो हमारा शरीर अभी रूकी(विरामावस्‍था) मे रहता तो वह पीछे की तरफ गिरने लगता है पर जब वह बस के साथ गति की अवस्‍था में आ जाता है जैसे ही ब्रेक लगता है तो वह आगे की ओर झुक जाता है।


जड़त्‍व- किसी वस्‍तु का जड़त्‍व उसका वह प्राकृतिक गुण है, जो उसकी विराम या गति की अवस्‍था में परिवर्तन का विरोध करता है। जड़त्‍व मतलब अपनी स्थिति।
*किसी वस्‍तु का द्रव्‍यमान उसके जड़त्‍व की माप होती है।
भारी वस्‍तुओं का जड़त्‍व अधिक होता है।
प्रश्‍न- रेलगाड़ी और ठेलेगाड़ी मे से किसका जड़त्‍व अधिक होगा।
इसका उत्‍तर कमेंट में दे।

Newton’s Second law

GK Force Motion and Gravity
गति का द्वितिय नियम
इस नियम मे त्‍वरण उस पर लगाए गए बल पर कैसे निर्भर
होता है तथा उस बल की माप कैसे होती है इसी से संबंधित है।
*नियम- किसी वस्‍तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगने वाल वाह्य बल के समानुपाती होता है।
संवेग-
किसी वस्‍तु का संवेग उस वस्‍तु के द्रव्‍यमान तथा वेग के गुणनफल को कहते हैं।
P=mv
*वस्‍तु के द्वारा उत्‍पन्‍न प्रभाव वस्‍तु के द्रव्‍यमान एवं वेग पर निर्भर करता है।
बल का समीकरण- F= ma


उदाहरण- क्रिकेट के खेल मे कैच लपकने के लिए
क्षेत्ररक्षक गेंद के साथ अपन हाथों को धीरे-धीरे पीछे की ओर खींचता है ताक‍ि उसे चोट न लगे ।
पर अब आप सोचेंगे की ठीक है ये उदाहरण चल जायेगा
लेकिन अगर परीक्षा मे कुछ और आ गया तो, इस समस्‍या
के लिए आपको बता रहा हूं कि आप किसी भी उदाहरण को कैसे समझेंगे-


जब भी कही संवेग परिवर्तन से संबंधित उदाहरण मिले तो
समझ जाइये कि वहां गति का द्वितिय नियम है। संवेग परिवर्तन अर्थात उसके वेग में या उसका द्रव्‍यमान मे समय के साथ जो भी चेंज हो रहा हो ता वही संवेग परिवर्तन है।
यहां क्रिकेट के कैच मे जो आप हाथ पीछे ले जा रहे हैं तो ध्‍यान दीजिये कि गेंद जिस स्‍पीड से आ रही थी आपके हाथ मे पहुचने के बाद धीरे धीरे उसके वेग में कमी आने लगी है तो यही है संवेग परिवर्तन।

Newton’s Third law

Force Motion and Gravity
गति का तृतिय नियम
प्रत्‍येक क्रिया के समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है। इसे क्रिया प्रतिक्रिया का नियम भी कहते हैं।
ये बल कभी एक वस्‍तु पर कार्य नहीं करते बल्कि ये दो विभिन्‍न वस्‍तुओं पर कार्य करती हैं।

संवेग संरक्षण का नियम
“यदि किसी वस्तु पर आरोपित सभी बलों का मान शून्य है
अर्थात परिणामी बल का मान शून्य है तो उस वस्तु के
संवेग का मान स्थिर रहता है , इसी को ही संवेग संरक्षण
का नियम कहते है। ” अर्थात कुल परिणामी बल F = 0 तो
संवेग = स्थिरांक। यही संवेग संरक्षण का नियम है।
उदाहरण- रॉकेट की उड़ान एक शानदार उदाहरण है जिसमे न्यूटन का तीसरा नियम या संवेग संरक्षण का नियम लागु होता है |


गुरूत्‍वाकर्षण बल (Gravitational Force)

Force Motion and Gravity
वह बल जिसके द्वारा पृथ्‍वी किसी वस्‍तु को अपनी ओर खींचती है या खींचने का प्रयास करती है। विश्‍व के सभी पिंड एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, वस्‍तुओं के बीच यह आकर्षण बल गुरूत्‍वाकर्षण बल कहलाता है।


गुरूत्‍वाकर्षण सार्वत्रिक नियतांक
इसका मात्रक न्‍यूटन वर्ग मीटर /प्रति वर्ग किलोग्राम है। इसका मान 6.673*10 की घात -11 है। इसका मान हैनरी कैवेंडिस ने लगाया था।
यह नियम सार्वत्रिक इसलिए है कि यह सभी वस्‍तुओं पर लागू होता है, चाहे ये वस्‍तुएं बड़ी हो या छोटी चाहे अंतरिक्ष की हो या पृथ्‍वी की।
किन्‍हीं दो पिंडों के बीच आकर्षण बल उन दोनों के द्रव्‍यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्‍युत्‍क्रमानुपाती होता है।
पलायन वेग- वह न्यूनतम वेग जिसे किसी वस्तु को देने पर वह ग्रह के गुरुत्वाकर्षण बल क्षेत्र से बाहर निकल सके और वापस लौटकर कभी न आये , उस न्यूनतम वेग को पलायन वेग कहते हैं।


महत्‍वपूर्ण त‍थ्‍य (Important Facts)

Force Motion and Gravity
यह बल एक कमजोर बल है जब तक कि बहुत अधिक द्रव्‍यमान वाले पिंड संबद्ध न हों।
पृथ्‍वी द्वारा लगाए जाने वाले गुरूत्‍वाकर्षण बल को गुरूत्‍व बल कहते हैं। इसका मान 9.8 मी/वर्ग से. होता है।
गुरूत्‍वीय बल पृथ्‍वी तल से ऊंचाई बढ़ने पर कम होता जाता है। यह पृथ्‍वी तल के विभिन्‍न स्‍थानों पर भी परिवर्तित होता है और इसका मान ध्रुवों से विषुवत वृत्‍त की ओर घटता जाता है।
ध्रुवों पर इसका मान सबसे अधिक तथा भूमध्‍य पर सबसे कम होता है।
किसी वस्‍तु का भार वह बल है जिससे पृथ्‍वी उसे अपनी ओर आकर्षित करती है।
किसी वस्‍तु का भार भिन्‍न-भिन्‍न स्‍थानों पर अलग-अलग हो सकता है किंतु द्रव्‍यमान स्‍थिर रहता है।
चंद्रमा पर गुरूत्‍वीय बल का मान पृथ्‍वी से 6 गुना कम होता है।

Other Facts


* g वस्तु के रूप ,आकार ,द्रव्यमान आदि पर निर्भर नहीं
करता।
* पृथ्वी कि सतह से ऊपर या नीचे जाने पर g का मान कम होता है।
* यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परीत: घूमना बंद कर दे तो g
के मान में ध्रुवो को छोड़कर शेष स्थानों पर वृद्धि हो जाएगी।
* जब लिफ्ट ऊपर की ओर जाती है तो लिफ्ट में स्थिर पिंड का भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है।
* यदि नीचे उतरते समय लिफ्ट की डोरी टूट जाए तो एक
मुक्त पिंड की भांति नीचे गिरती है ऐसी स्थिति में पिंड का भार शून्‍य होता है।
* पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान 11.2 km/s होता है।
* ऐसा उपग्रह जो पृथ्वी के अक्ष के लंबवत तल से पश्चिम
से पूरब की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं भू स्थाई उपग्रह (Geo-stationary satellites) कहलाते हैं।

ऐसे और विज्ञान से संबंधित जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
http://www.envfor.nic.in
https://www.britannica.com/science/biology

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