The Great Wall Of India (कुंभलगढ़)

History

द ग्रेट वाल ऑफ इंडिया (The Great Wall Of India)

अभी तक आपने द ग्रेट वाल आफ चाइना(The Great Wall Of China) के बारे में सुना था, क्‍या आप जानते हैं कि एक ग्रेट वाल भारत मे भी है, जिसे भारत की महान दिवार (The Great Wall Of India) कहते हैं। आइये हम आपको बताते हैं यह कहॉं और कब बना था।


यह The Great Wall of India भारत के राजस्‍थान राज्‍य के राजसमंद जिले में है। यह कुंभलगढ़ के किले के नाम से प्रसिद्ध है।
कुम्भलगढ़ का दुर्ग राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है। सामरिक महत्त्व के कारण इसे राजस्थान के द्वितीय महत्त्वपूर्ण क़िले का स्‍थान दिया जाता है।
इसके निर्माण का श्रेय महाराणा कुम्भा को जाता है, जिन्‍होंने 1443 से 1458 के बीच प्रसिद्ध वास्‍तुकार मंडन के पर्यवेक्षण में इसका निर्माण करवाया।

ऐसा विश्‍वास किया जाता है कि इस क़िले का निर्माण प्राचीन महल के स्‍थल पर ही करवाया गया था जो ईसा पूर्व दूसरी शताब्‍दी के जैन राजकुमार सम्प्रति से संबद्ध था।
इस दुर्ग का निर्माण सम्राट अशोक के दुसरे पुत्र सम्प्रति के बनाये दुर्ग के अवशेषों पर 1443 से शुरू होकर 15 वर्षों बाद 1458 में पूरा हुआ था।

दुर्ग का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भा ने सिक्के भी ढलवाये, जिन पर दुर्ग और उसका नाम अंकित था।

Introduction

यह किला राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 13
मई 1459 वार शनिवार को कराया था।
इस किले को ‘अजेयगढ’ कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था।
इसके चारों ओर एक बडी दीवार बनी हुई है जो शत्रुओं से रक्षा के लिए बनाया गया था।
यह चीन की दीवार के बाद विश्व कि दूसरी सबसे बडी दीवार है।
इस किले की दीवारे लगभग ३६ किमी लम्बी है और राजस्‍थान के पहाड़ी किलो में शामिल यह
किला यूनेस्को UNESCO की सूची में सम्मिलित है

वास्तुशास्त्र के नियमानुसार बने इस दुर्ग में प्रवेश द्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाने के लिए
संकटकालीन द्वार, महल, मंदिर, आवासीय इमारतें, यज्ञ वेदी, स्तम्भ, छत्रियां आदि बने है।

यह दुर्ग(The Great Wall Of India) कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजेय रहा।
इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल, मंदिर व आवासीय इमारते बनायीं गई और समतल भूमि का
उपयोग कृषि कार्य के लिए किया गया।
वहीं ढलान वाले भागो का उपयोग जलाशयों के लिए कर इस दुर्ग को जितना हो सके उतना स्वाबलंबी बनाया गया।
इस दुर्ग के भीतर एक और गढ़ है जिसे कटारगढ़ के नाम से जाना जाता है। यह गढ़ सात विशाल
द्वारों व सुद्रढ़ प्राचीरों से सुरक्षित है।
इस गढ़ के शीर्ष भाग में बादल महल है व कुम्भा महल सबसे ऊपर है।
पर्यटक किले के ऊपर से आस पास के रमणीय दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।

ऐतिहासिक तथ्‍य (Historical facts)

महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुम्भलगढ़ एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है।
महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक मेवाड़ पर हुए आक्रमणों के समय
राजपरिवार इसी दुर्ग में रहा।
यहीं पर कुंवर पृथ्वीराज और राणा सांगा का बचपन बीता था।
महाराणा उदय सिंह को भी पन्ना धाय ने इसी दुर्ग में छिपा कर पालन पोषण किया था।
हल्दी घाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप भी काफी समय तक इसी दुर्ग में रहे।

इस दुर्ग के बनने के बाद ही इस पर आक्रमण शुरू हो गए लेकिन एक बार को छोड़ कर ये दुर्ग प्राय: अजेय ही रहा है
लेकिन इस दुर्ग की कई दुखांत घटनाये भी है जिस महाराणा कुम्भा को कोई नहीं हरा सका वही
परमवीर महाराणा कुम्भा इसी दुर्ग में अपने पुत्र ऊदा सिंह द्वारा राज्य पिपासा में मारे गए।
कुल मिलाकर दुर्ग ऐतिहासिक विरासत की शान और शूरवीरों की तीर्थ स्थली रहा है।
और अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्‍लिक करें – कुंभलगढ़ का किला

इस दिवार पर चार घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं, इसलिए इसे भारत की महान
दीवार(The Great Wall Of India) के नाम से जाना जाता है।

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