धूमकेतु (पुच्‍छल तारा) क्‍या होता है (WHAT IS COMET)

Physics Space & Time

धूमकेतु (Comet)भी हमारे सौर परिवार के सदस्‍य हैं। ये अत्‍यंत परवलीय कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। ये कभी-कभी एस्‍टेरॉयड की तरह प्रतीत होते हैं।

परन्‍तु, इनका सूर्य का परिक्रमणकाल काफी अधिक होता है। सामान्‍यत: धूमकेतु चमकीले सिर तथा लम्‍बी पूँछ वाले होते हैं।

जैसे-जैसे कोई धूमकेतु सूर्य के समीप आता जाता है इसकी पूँछ आकार में बढ़ती जाती है।
धूमकेतु या पुच्छल तारे चट्टान, धूल और जमी हुई गैसों के बने होते हैं।

सूर्य के समीप आने पर, गर्मी के कारण, जमी हुई गैसें और धूल के कण सूर्य से विपरीत दिशा में फैल जाते हैं और सूर्य की रोशनी परिवर्तित कर चमकने लगती हैं।

किसी धूमकेतु(Comet) की पूँछ सदैव ही सूर्य से विपरित होती है।


इस समय इनकी आकृति को दो मुख्य भागों सिर तथा पूँछ में बांट सकते हैं। सिर का केंद्र अति चमकीला होता है। यह इसका नाभिक कहलाता है।



सूर्य की विपरीत दिशा में बर्फ और धूल का चमकीला हिस्सा पूँछ की तरह से लगता है। इसे कोमा कहा जाता है।

यह हमेशा सूर्य से विपरीत दिशा में रहता है। धूमकेतु की इस पूँछ के कारण इसे पुच्छल तारा कहा जाता है।

ऐसे बहुत से धूमकेतु ज्ञात हैं जो समय-समय पर एक निश्‍चित काल-अंतराल पर दृष्टिगोचर हाेते हैं।

हैली धूमकेतु एक ऐसा ही धूमकेतु है जो लगभग हर 76 वर्ष के अंतराल में दिखाई देता है।
इसे सन् 1986 में पिछली बार देखा गया था।

अन्‍य तथ्‍य(About Comet)

Comet शब्द, ग्रीक शब्द komētēs से बना है जिसका अर्थ होता है hairy one बालों वाला।
यह इसी तरह दिखते हैं(therefore) इसलिये यह नाम पड़ा।

सूर्य से दूर जाने पर धूल और बर्फ पुन: इसके नाभिक में जम जाती है।

हर बार जब यह सूर्य के पास आता है तो कुछ न कुछ इनकी धूल और बर्फ बिखर जाती है

जिसके कारण इनकी पूंछ छोटी होती जाती है और अक्सर यह पूंछ विहीन हो जाते हैं।

वैज्ञानिक पद्धति के विकास के पहले धुमकेतूओं के नाम कई तरीकों से रखे जाते थे |

20 वीं सदी के पहले धुमकेतूओं के नाम वर्ष के आधार पर रखे जाते थे, जैसे कि ‘ १५८० का महान धुमकेतू ‘, ‘ सितम्बर १८८२ का महान धुमकेतू

धूमकेतुओ के विषय में अंधविश्‍वास

कुछ व्‍यक्‍ति ऐसा सोचते हैं कि धूमकेतु घोर विपत्तियों, जैसे- युद्ध, महामारी, बाढ़ आदि के संदेशवाहक होते हैं।

परन्‍तु ये सब मिथक तथा अंधविश्‍वास है। धूमकेतु का दिखना एक प्राकृतिक घटना है। इनसे डरने की आवश्‍यकता नही है।

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