LET’S KNOW ABOUT THE MOON

Physics Space & Time

आओ जाने चन्‍द्रमा के बारे मे(Moon Surface)

Moon Surface (all you have to know how moon surface looks like).
Why is the sky of the village so different from the city sky. Due to bright light, smoke and dust, the clear sky is rarely seen in big cities. It can be fascinating to look at the night sky where the atmosphere is clean and there is no bright light. Look up at the sky in a clear dark night, you will see numerous stars like dots all over the sky, some very bright and some relatively dim. Do they all seem to flicker? Do you see any object like star that is not flickering? These bodies, which do not appear to twinkle, are planets. (moon surface)

चन्‍द्रमा कैसे दिखता है

शहरो के आकाश से गांव का आकाश इतना भिन्‍न क्‍यों है। चमकीले प्रकाश, धुऍं तथा धूल के कारण, बड़े शहरों में तो स्‍वच्‍छ आकाश विरले ही दिखाई देते हैं। रात्रि के आकाश का अवलोकन करना चित्‍ताकर्षक वहीं हो सकता है जहॉं वातावरण स्‍वच्‍छ हो तथा चमकीला प्रकाश न हो।
किसी स्‍वच्‍छ अंधेरी रात्रि में आकाश की ओर दृष्टि डालिए आपको, समस्‍त आकाश में बिंदुओं के समान असंख्‍य तारे दिखाई देंगे जिनमें कुछ बहुत चमकीले और कुछ अपेक्षाकृत मंद होंगे। क्‍या ये सभी टिमटिमाते प्रतीत होते हैं। क्‍या आपको तारे जैसा कोई ऐसा पिंड दिखाई देता है जो टिमटिमा न रहा हो। इनमे जो पिंड टिमटिमाते नहीं दिखते, वे ग्रह, हैं।

The most illuminated object in the night sky is the moon. Stars, planets, moons and many other objects of the sky are called celestial bodies. Does the shape of the moon change every day: Are there days when the shape of the moon appears to be perfectly round? Are there days when the moon cannot seen even when there is a clear sky?

रात्रि के आकाश में सबसे अधिक प्रदीप्‍त पिंड चन्‍द्रमा है। तारे, ग्रह, चन्‍द्रमा तथा आकाश के बहुत से अन्‍य पिंड खगोलिय पिंड कहलाते हैं।
क्‍या चन्‍द्रमा की आकृति में प्रतिदिन परिवर्तन होता है: क्‍या ऐसे भी दिन है जब चन्‍द्रमा की आकृति पूर्णत: गोल प्रतीत होती है। क्‍या ऐसे भी दिन हैं जब स्‍वच्‍छ आकाश होने पर भी चन्‍द्रमा को नहीं देखा जा सकता।

Important Facts

On the day when the full moon of the moon is seen, it is called Purnima. After this, every night the moon shines brightly. Moon is not visible on the fifteenth day, this day is called Amavasya. The next day, a small part of the moon appears in the sky, it is called Balachandra. After that, every day the moon gets bigger. On the fifteenth day once again, we see a full view of the moon.
The various shapes of the bright part of the moon that are visible throughout the month are called the arts of the moon.
The Moon revolves around the Earth once every 27.32 days.

महत्‍वपूर्ण तथ्‍य


उस दिन को जब चन्‍द्रमा की पूर्ण चक्र‍िका दिखाई देती है, पूर्णिमा कहते हैं। इसके पश्‍चात हर एक रात्रि को चन्‍द्रमा चमकीला भाग घटता चला जाता है। पंद्रहवें दिन चन्‍द्रमा दिखाई नहीं पड़ता इस दिन को अमावस्‍या कहते हैं। अगले दिन, चन्‍द्रमा का एक छोटा भाग आकाश में दिखाई देता हैा इसे बालचन्‍द्र कहते हैं। उसके बाद फिर हर दिन चन्‍द्रमा बड़ा होता जाता है। पंद्रहवें दिन एक बार फिर से हम चन्‍द्रमा का पूरा दृश्‍य देखते हैं।
पूरे माह तक दिखाई देने वाली चन्‍द्रमा के चमकीले भाग की विभिन्‍न आकृतियों को चन्‍द्रमा की कलाऍं कहते हैं।
चंद्रमा हर 27.32 दिनों में एक बार पृथ्‍वी की परिक्रमा करता है।

More facts

The period from one full moon to another full moon is slightly more than 29 days. We see the moon because it reflects the sunlight falling on us. Therefore, we are able to see the same part of the moon, the part from which the reflected light of the sun reaches us. After seeing the moon after the moon, the illuminated part of the moon increases daily. After the full moon when viewed from Earth, the sun’s illuminated portion of the moon decreases in size every day.
The moon completes a rotation on its axis in completing a rotation of the Earth.

अन्‍य तथ्‍य


एक पूर्णिमा से दूसरे पूर्णिमा की अवधि 29 दिन से कुछ अधिक होती है। हमें चन्‍द्रमा इसलिए दिखाई देता है क्‍योंकि यह अपने पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को हमारी ओर परावर्तित कर देता है। इसीलिए, हम चन्‍द्रमा के उसी भाग को देख पाते हैं, जिस भाग से सूर्य का परावर्तित प्रकाश हम तक पहुँचता है।
बालचन्‍द्र के पश्‍चात पृथ्‍वी से देखने पर प्रतिदिन चन्‍द्रमा के प्रदीप्‍त भाग में वृद्धि होती जाती है। पूर्णिमा के पश्‍चात पृथ्‍वी से देखने पर चन्‍द्रमा का सूर्य द्वारा प्रदीप्‍त भाग प्रतिदिन आकार में घटता जाता है।
चन्‍द्रमा पृथ्‍वी की एक परिक्रमा पूरी करने में अपने अक्ष पर एक घूर्णन पूरा करता है।

MOON SURFACE

When the astronauts stepped on the moon, they found the moon’s pages dusty and uninhabitable. There are different types of pits on it. It also has many steep hills. Some of these mountains are similar in height to the highest mountains of the earth.
There is neither an atmosphere nor water on the moon. Is there a possibility of some kind of life on the moon? However, India launched a mission called Chandrayaan in 2008 to detect water on the moon.And also confirmed water (NASA also confirmed it). Recently Chandrayaan-2 had launched in 2019.
Sound cannot be heard on the moon because the medium is necessary for the transmission of sound.

चन्‍द्रमा का पृष्‍ठ

जब अन्‍‍तरिक्षयात्रियों ने चन्‍द्रमा पर कदम रखा तो उन्‍होंने चन्‍द्रमा के पृष्‍ठों को धूल भरा तथा निर्जन पाया। उस पर विभिन्‍न प्रकार के गड्ढे हैं। इस पर बहुत से खड़ी ढाल वाले ऊंचे पर्वत भी हैं। इनमें से कुछ पर्वत तो ऊंचाई में पृथ्‍वी के सर्वाधिक ऊंचाई के पर्वतों के समान हैं।
चन्‍द्रमा पर न तो वायुमण्‍डल है और न ही जल। क्‍या चन्‍द्रमा पर किसी प्रकार के जीवन की संभावना हो सकती है। हांलाकि भारत ने चन्‍द्रमा पर जल का पता लगाने के लिए चन्‍द्रयान नामक मिशन 2008 में लांच किया था। और जल की पुष्टि भी की (नासा ने भी इसकी पुष्टि की) । हाल ही में चन्‍द्रयान-2 2019 में लांच किया था।
चन्‍द्रमा पर ध्‍वनि को सुना नही जा सकता क्‍योंकि ध्‍वनि के संचरण के लिए माध्‍यम आवश्‍यक है।

On July 1, 1969, US astronaut Neil Armstrong first set foot on the moon. After them, Edwin Aldrin landed on the moon. Sea fever and reflux come because of the gravitational power of the moon. Luna-1 of the Soviet nation was the first spacecraft that passed by the moon, but Luna-2 was the first spacecraft to land on the moon.
It takes about 1.3 seconds for light to come to Earth from the moon.


about moon surface
21 जुलाई 1969, को अमेरिका के अन्‍तरिक्षयात्री नील आर्मस्‍ट्रांग ने सबसे पहले चन्‍द्रमा पर अपने कदम रखे। उनके बाद एडविन एल्‍डरिन चन्‍द्रमा पर उतरे।
समुद्री ज्‍वार और भाटा चन्‍द्रमा की गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति के कारण आते हैं।

सोवियत राष्ट् का लूना-१ पहला अन्तरिक्ष यान था जो चन्द्रमा के पास से गुजरा था लेकिन लूना-२ पहला यान था जो चन्द्रमा की धरती पर उतरा था

चन्‍द्रमा से धरती पर प्रकाश को  आने में लगभग 1.3 सेकंड लगते हैं।

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